विशेष नवरात्रि पूजा

नवरात्रि

नवरात्रि का पर्व शक्ति और भक्ति का प्रतीक है। इस दौरान माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है।
 

महत्व:

 
•इस नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है।
•इसका धार्मिक महत्व यह है कि इन नौ दिनों तक साधक माता के प्रति उपवास, भजन, पूजा-पाठ, और हवन करते हैं।

•यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। नवरात्रि समाप्त होने के बाद दशहरा (विजयादशमी) मनाया जाता है, जो श्रीराम की रावण पर विजय का स्मरण कराता है।

नवरात्रि के दौरान भक्त उपवास रखते हैं, देवी के मंत्रों का जाप करते हैं और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। नौवें दिन, जिसे नवमी कहते हैं, देवी की पूजा के बाद कन्या पूजन किया जाता है। इसमें छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर भोजन कराया जाता है और उन्हें उपहार दिए जाते हैं।

नवरात्रि के नौ दिन और नौ रूप

 
नवरात्रि के प्रत्येक दिन माँ दुर्गा के एक विशेष रूप की पूजा की जाती है:
पहला दिन – माँ शैलपुत्री: पर्वतराज हिमालय की पुत्री।
दूसरा दिन – माँ ब्रह्मचारिणी: तप और साधना की देवी।
तीसरा दिन – माँ चंद्रघंटा: साहस और वीरता की देवी।
चौथा दिन – माँ कूष्मांडा: ब्रह्मांड की निर्माता।
पांचवां दिन – माँ स्कंदमाता: भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता।
छठा दिन – माँ कात्यायनी: योद्धा देवी।
सातवां दिन – माँ कालरात्रि: अंधकार और भय को दूर करने वाली।
आठवां दिन – माँ महागौरी: शांति और पवित्रता की देवी।
नौवां दिन – माँ सिद्धिदात्री: सभी सिद्धियां प्रदान करने वाली।
 
 

कैसे मनाते हैं?

 

पूजा-विधि:

•कलश स्थापना (घटस्थापना)
•अखंड ज्योति प्रज्वलित करना
•माता के विभिन्न रूपों की पूजा और व्रत
•दुर्गा सप्तशती या देवी महात्म्य का पाठ
•अष्टमी/नवमी पर कन्या पूजन
 
 यह नवरात्रि विशेष रूप से साधना, तप और आत्मशुद्धि के लिए उत्तम समय माना जाता है 

नवरात्रि पूजा

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